व्यवस्था की विसंगति
बौना कानून , माननीय उच्च न्यायालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेश भी बौने ? खाता ना बही अफसर जो कहे जो करे वही सही ? जन हितकारी लोकप्रिय सरकार की छवि धूमिल करने के लिए कानपुर विकास प्राधिकरण और कानपुर नगर निगम के अधिकारी कर रहे हैं मनमानी ?
वर्ष 2008 से प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था की विसंगति के शिकार 95 वर्षीय अति वरिष्ठ नागरिक राम खेलावन मिश्रा के संघर्ष की सच्ची कहानी।
कानपुर विकास प्राधिकरण और कानपुर नगर निगम के अधिकारी शासन में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में सुसंगठित भूमाफियाओं की तरह कर रहे हैं आचरण ?
वर्ष 1957 मे जारी अधिगृहण आदेश जिसमे राम खेलावन मिश्रा का नाम तक नहीं है , का दुरुपयोग कर उनके स्वामित्व की भूमि पर कानपुर विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2008 जबरन कब्जा कर अपने स्वामित्व का बोर्ड। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 8 सप्ताह में प्रकरण का निस्तारण शासन द्वारा पारित आदेश की उपहास पूर्वक अवहेलना कर 6 वर्षो में भी निस्तारण न करने से हताश और निराश राम खेलावन मिश्रा के प्रार्थना पत्र पर यशस्वी मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा पारित आदेशो से छुब्द्ध हो कर सुनील कुमार सिंह, विशेष सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन उत्तर प्रदेश ने राम खेलावन मिश्रा द्वारा प्रस्तुत स्वामित्व के अकाट्य प्रमाणों और कानून की असत्य और मनमानी व्याख्या कर पुनरीक्षण वाद को किया निरस्त । माननीय उच्च न्यायालय , मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा सुनील कुमार सिंह द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध योजित याचिका पर अग्रिम सुनवाई तक यथा स्थिति बनाये रखने के लिए पारित किया आदेश । कानपुर नगर निगम के अधिकारीयथा स्थिति बनाये रखने के लिए पारित आदेश प्राप्त होने के बाद भी । राम खेलावन मिश्रा की भूमि पर जबरन कराते रहे निर्माण कार्य ।
कानपुर निवासी राम खेलावन मिश्रा वर्ष 1950 से पट्टा धारक और 1952 से संक्रमणीय भूमिधर के रूप में तहसील कानपुर नगर में आराजी संख्या 80 और 95 के स्वामी है। मिश्रा जी के प्रार्थना पत्र दिनांक 28. 12. 1981 के उत्तर में दिनांक 25.01.1982 को सहायक नगर अधिकारी संपत्ति विभाग ने पत्र संख्या डी 1884 (5) सीपी मे स्पष्ट रूप से लिख कर दिया था , कि 80 तथा 95 नम्बरान, ग्राम वाजिदपुर जाजमऊ , कानपुर नगर का जुज भाग अभी अर्जित नहीं है। उपरोक्त अनार्जित आराजी पर नया निर्माण विकास प्राधिकरण के नियम अनुसार मानचित्र स्वीकृत कराकर व बेटरमेंट जमा करा कर ही किया जा सकता है। राम खेलावन मिश्रा का नाम तहसील कानुपर नगर के अभिलेखों ( खतौनियों ) में भी वर्ष 2009 तक भू स्वामी के रुप में दर्ज था। समस्या तब आयी जब राम खेलावन मिश्रा वर्ष 2008 में अपनी भूमि पर बाउंड्री करवा रहे थे , तभी कानपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बुलडोजर चला कर बाउंड्री वॉल गिरा दी और कानपुर विकास प्राधिकरण के स्वामित्व का बोर्ड लगाने के बाद उक्त भूमिका नामांतरण भी तहसीलदार कानपुर से कानपुर विकास प्राधिकरण के नाम पर करवा लिया।
घटना से हैरान और परेशान राम खेलावन मिश्रा ने विद्वान अधिवक्ताओं की सलाह पर कानपुर विकास प्राधिकरण के अवैध कब्जे को रोकने के लिए निषेधाज्ञावाद माननीय न्यायालय कानपुर नगर एवं कानपुर विकास प्राधिकरण के अवैध नामांतरण को रद्द करने के लिए माननीय न्यायालय उप जिला अधिकारी कानपुर नगर के न्यायालय में वाद प्रस्तुत किए थे। उपरोक्त न्यायालय से कोई राहत न मिलने के कारण विद्वान अधिवक्ताओं की सलाह पर राम खेलावन मिश्रा जी ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी याचिका संख्या 3250/2009 योजित की , माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने सुनवाई के उपरांत 2009 को यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश पारित करने के बाद दिनांक 12.09.2016 को माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया था , कि याची आदेश की एक प्रति के साथ अपना पक्ष प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और विपक्षी अर्थात प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन कानपुर विकास प्राधिकरण से रिकार्ड तलब करने के बाद 8 सप्ताह में प्रकरण का निस्तारण करेंगे। माननीय उच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेश के अनुपालन में रामखेलावन मिश्रा ने आदेश की सत्य प्रतिलिपि के साथ अपना पक्ष (प्रत्यावेदन) निर्धारित समयावधि में प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को पंजीकृत डाक से प्रेषित कर दिया था।
राम खेलावन मिश्रा जी के अथक प्रयासों के बाद 8 सप्ताह के स्थान पर जब 2022 तक उक्त प्रकरण का निस्तारण विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन द्वारा नहीं किया गया तब दिनांक 28.10.2022 को राम खेलावन मिश्रा द्वारा प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को दिनांक 28.10.2022 को पंजीकृत डाक से प्रार्थना पत्र प्रेषित कर संलग्न सुसंगत साक्ष्यों के आलोक में बिंदु संख्या एक लगायत 11 में अंकित तथ्यों का अवलोकन कर , कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जबरन किए गए कब्जे से प्रार्थी की भूमि को और मुक्त करने और उक्त भूमि से कानपुर विकास प्राधिकरण का नाम खारिज कर प्रार्थी के नाम पर नामांतरण किए जाने का आदेश न्यायहित में शीघ्र पारित करने की प्रार्थना की थी । उपरोक्त के बाद भी माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश की उपहासपूर्वक अवहेलनाकर प्रार्थी के प्रकरण को लंबित रखने से हैरान और परेशान राम खेलावन मिश्रा ने दिनांक 31-10-2022 को यशस्वी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को दिनांक 31.10.2022 को प्रार्थना पत्र प्रेषित कर श्रीमान प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन उत्तर प्रदेश शासन और उनके अधीन कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद और उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित स्पष्ट आदेश निर्देशों की उपहासपूर्वक अवहेलना करने के साथ ही अपने पदीय और संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग कर प्रार्थी की भूमि पर जबरन कब्जा करने वाले कानपुर विकास प्राधिकरण में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने की शिकायत की थी और कानपुर विकास प्राधिकरण के अवैध कब्जे से प्रार्थी की भूमि को अवमुक्त करने तथा उक्त भूमि से कानपुर विकास प्राधिकरण का नाम खारिज कर नामांतरण भी प्रार्थी के नाम पर किए जाने का आदेश पारित करने की प्रार्थना की थी। उपरोक्त पत्र पर कार्यालय मुख्यमंत्री , उत्तर प्रदेश , लोक भवन ने उसी दिन आदेश पारित कर प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को प्रकरण में परीक्षण उपरांत निर्माण अनुसार कार्यवाही कार्य एक पक्ष में पत्रावली पर आख्या उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई थी। कार्यालय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के उपरोक्त स्पष्ट आदेश के अनुपालन में तीन माह तक कोई कार्यवाही न किए जाने के कारण कार्यालय मुख्यमंत्री से दिनांक 09.01.2023 को उपरोक्त संबंध में यथोचित कार्यवाही करते हुए पत्रावली पर शीघ्र अवगत कराने की अपेक्षा की गई थी , उपरोक्त सबके बाद सुनील कुमार सिंह विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन ने अपने पत्र दिनांक 21 मार्च 2023 के द्वारा प्रकरण को निस्तारित किए बिना ही आई0जी0आर0एस0 से विलोपित करानेे के प्रयास में असफल होने के बाद माननीय उच्च न्यायालय के आदेश में कानपुर डेवलपमेंट एक्ट 1973 की धारा 41 (3) की असत्य और मनमानी व्याख्या कर राम खेलावन मिश्रा के प्रत्यावेदन को बलहीन बताते हुए निरस्त कर दिया था और माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी आदेश दिनांक 16 अगस्त 2023 में राम खेलावन मिश्रा जी द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों को बलहीन लिखने का कोई कारण अंकित नहीं किया था।
सुनील कुमार सिंह द्वारा उपरोक्त आदेश की सत्यापित छायाप्रति प्रदान न किये जाने के कारण , रामखेलावन मिश्रा द्वारा जन सूचना अधिकारी , विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन , अनुभाग - 8 को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दिनांक 14.09.2023 को आवेदन पत्र प्रेषित कर , श्री सुनील कुमार सिंह विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन उत्तर प्रेदेश द्वारा पारित आदेश दिनॉक: 16.08.2022 की सत्यापित छायाप्रतियॉ , राम खेलावन मिश्रा के प्रार्थना पत्र दिनॉक: 28.10.2022 में अंकित आराजी संख्या 80 व 95 के स्वामित्व तथा उक्त भूमि को अधिगृहीत न किये जाने के अकाट्य प्रमाणों , जिनको श्री सुनील कुमार सिंह ने आदेश दिनॉक: 16.08.2022 में स्वीकार भी किया है , को बलहीन घोषित करने के करणों की सूचना तथा उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 41 (3) को असत्य और मनमाने तरीके से परिभाषित कर राम खेलावन मिश्रा के पुनरीक्षण वाद को खारिज/निरस्त करने के कारणों एवं उद्देश्यों की सूचना शीघ्राति शीघ्र प्रदान करने का अनुरोध किया था, किन्तु उपरोक्त 3 बिन्दुओं में अंकित अभिलेख एवं सूचना आज तक प्रदान नहीं किए गए हैं । सुनील कुमार सिंह विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन द्वारा दिनांक 16.08.2023 को पारित आदेश के विरुद्ध रामखेलावन मिश्र द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में पुनः आयोजित याचिका सी - नंबर 30588/2023 में माननीय न्यायालय मुख्य न्यायमूर्ति महोदय द्वारा स्टेटस को अर्थात यथास्थिति बनाए रखने के लिए आदेश पारित किया गया था ,
जिसके बाद कानपुर नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा राम खेलावन मिश्रा के स्वामित्व की भूमि पर जबरन कब्जा करने के लिए प्रचलित कार्यवाही रोक लगाने के लिए , नगर आयुक्त , कानपुर नगर , जिला अधिकारी कानपुर नगर , आयुक्त कानपुर मण्डल कानपुर , प्रमुख सचिव , नगर विकास विभाग उत्तर प्रदेश को प्रेषित प्रार्थना पत्रों , स्मृति पत्रों , सूचना का अधिकार अधिनियम के अर्न्तगत प्रेषित आवेदन पत्रों में चाही गयी सूचना एवं अभिलेख प्रदान न करने तथा कानुपर नगर निगम के अधिकारियों की अवैध गतिविधियों पर रोक न लगाने के कारण प्रथम अपीली जन सूचना अधिकारियों का प्रेषित अपीली प्रार्थना पत्रों तथा प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग उत्तर प्रदेश शासन को पंजीकृत डाक से दिनांक 25-10-2023 को प्रेषित स्मृति पत्र और आई0जी0आर0एस0 नगर आयुक्त को कार्यवाही हेतु प्राप्त होने के बाद भी , माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की उपहासपूर्वक अवहेलना कर आराजी संख्या 80 पर जबरन कब्जा कर कानपुर नगर निगम प्रचलित कार्यवाही पर माननीय उच्च् न्यायालय मे अवमानना वाद प्रस्तुत करने के बाद ही रोक लग पायी है।
उपरोक्त सबसे फिल्म कश्मीर फाइल्स का यह डायलॉग , कि सरकार किसी की हो सिस्टम हमारा है , के साथ ही यह भी सत्य ही प्रतीत होता है सरकारे बदलती हैं व्यवस्था नहीं। अब देखना यह है कि 95 वर्षीय अतिवरिष्ठ नागरिक को न्यायायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की इस विसंगति में जीवित रहते न्याय मिल पायेगा ?